देश के वीर

हिम्मत भी है, है हौसला, जो प्राण किया वो पाएंगे |
सागर मथ दिया था तभी, अब धरा चीर कर लायेंगे ||

पर्वत क्या रोकेगा हमें, यदुवंश के हम लाल है |
काल का जो काल है, उस काल के हम बाल है ||

उठ वीर मेरे, अब हल उठा, बाली का वो बल दिखा |
सींच कर अपने लहू से, इस देश को आगे बढ़ा ||

रघुवंश के हम वीर है, सागर भी लाँघ जायेंगे |
पर्वतो को काट कर, नयी राह हम दिखलायेंगे ||